प्रस्‍तावना

भारत सरकार द्वारा उदारीकरण, भूमण्‍डलीकरण एवं निजीकरण आरम्‍भ करने से देश में निर्माण उद्योग में उछाल आया है। पिछले कुछ वर्षों में देश में सड़क क्षेत्र में स्‍वर्णिम चतुर्भुज का निर्माण तथा आवास क्षेत्र में व्‍यापक विकास हुआ है। सड़क क्षेत्र में पूरब-पश्चिम गलियारे से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक यातायात एवं माल ढुलाई में सुविधा हुई है। सभी आर्थिक क्षेत्रों में आवासों की कमी तथा देश में आवास क्षेत्र में वृद्धि एवं विकास के महत्‍व का देखते हुए यह आशा की गयी है कि निकट भविष्‍य में देश में आवास उद्योग में अभूतपूर्व विकास होगा।  देश में वहनीय आवास की अवधारणा तेजी से फैल रही है।

आवास एवं सड़क दोनों के महत्‍व को ध्‍यान में रखते हुए, सीएसआईआर की महत्‍वपूर्ण प्रयोगशाला केन्‍द्रीय भवन अनुसंधान संस्‍थान, रुड़की,  संरचना इंजीनियरी, भू-तकनीकी इंजीनियरी, रसायन इंजीनियरी एवं पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्रों में, इंजीनियरी विज्ञान में पीएच.डी कार्यक्रम चला रही है। प्रयोगशाला में कार्यरत वैज्ञानिकों के मूल्‍यवान अनुभवों को शामिल करते हुए छात्रों के लिए सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक साइट अनुभव युक्‍त पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। ऐसा अद्वितीय अवसर देश में कभी-कभी ही उपलब्‍ध होता है। छात्रों एवं छात्राओं दोनों के लिए परिसर में पर्याप्‍त हॉस्‍टल सुविधाएं विद्यमान हैं।

कार्यक्रम में सीटों की संख्‍या

कुल 5 सीटें उपलब्‍ध हैं।

प्रवेश की योग्‍यता

पीएच.डी (विज्ञान) : भू-विज्ञान (जियोलोजी/जियोफिजिक्‍स) अथवा कैमिस्‍ट्री (इनऑर्गेनिक/आर्गेनिक/पॉलीमर) में मास्‍टर डिग्री अथवा कोरोजन साइंस में विशेषज्ञता सहित पदार्थ विज्ञान में मास्‍टर डिग्री एवं साथ में राष्‍ट्रीय स्‍तर की फैलोशिप (विविध फंडिंग एजेंसियों जैसे सीएसआईआर, यूजीसी, डीबीटी, डीएसटी आदि की जेआरएफ/एसआरएफ, इन्‍सपायर अथवा अन्‍य समकक्ष फैलोशिप)

पीएच.डी (इंजीनियरी) : उपयुक्‍त गेट स्‍कोर अथवा यूजीसी/सीएसआईआर नैट/एन बी एच एम अथवा उपयुक्‍त सीएसआईआर-एस आर एफ या समकक्ष फैलोशिप के साथ इंजीनियरी/प्रौद्योगिकी (सिविल- संरचनात्‍मक, भू-तकनीकी) में मास्‍टर डिग्री अथवा इंजीनियरी/प्रौद्योगिकी (कैमिकल/मैटलर्जीकल) में बैचलर डिग्री तथा कोरोजन साइंस/इंजीनियरी में एम.टैक।

सेमेस्‍टर के दौरान अंकों को अधिमान (वेटेज)

सेमेस्‍टर के मध्‍य में तथा अंत में एक-एक परीक्षा होगी। दोनों परीक्षाओं से पहले दो-दो क्‍लास टेस्‍ट होंगे। सेमेस्‍टर के अंत में होने वाली परीक्षा को 40 प्रतिशत अधिमान मिलेगा। सेमेस्‍टर के मध्‍य में होने वाली परीक्षा को 30 प्रतिशत अधिमान दिया जाएगा तथा दोनों क्‍लास टेस्‍ट को अलग-अलग 10 प्रतिशत अधिमान दिया जाएगा। शेष 10 प्रतिशत अधिमान संबंधित विषय में सेमीनार, टयूटोरियल, सामान्‍य अनुशासन आदि को दिया जाएगा।

अपेक्षित अंक (क्रेडिट)

पीएच.डी के लिए निम्‍नतम अपेक्षित अंक 16.12 हैं जो कि पाठ्यक्रम कार्यों के दौरान अर्जित करने हैं। कम से कम एक पाठ्यक्रम 700 स्‍तर का होना चाहिए। पाठ्यक्रम कार्यों के साथ-साथ सीएसआईआर 800 प्रोजेक्‍ट स्‍कीम के दर्शन पर आधारित ग्रामीण क्षेत्रों संबंधी एक प्रोजेक्‍ट पूरा करना होगा जिसकी अवधि छ: से आठ सप्‍ताह हो सकती है। प्रोजेक्‍ट के 2 अंक (क्रेडिट) होंगे। इसके अतिरिक्‍त किसी भी छात्र को दो परियोजना प्रस्‍ताव तैयार करने होंगे।

पीएच.डी थीसिस वर्क के लिए

  • डॉक्‍टोरल एडवाइजरी कमेटी (डीएसी)
    1. डीन के अनुमोदन के पश्‍चात, प्रत्‍येक अभ्‍यर्थी के लिए थीसिस सुपरवाइजर नियत होने तथा सीनेट द्वारा आवश्‍यक कार्रवाई कर देने के तुरंत बाद एसीएसआईआर प्रयोगशाला समन्‍वयक, प्रयोगशाला के निदेशक के अनुमोदन पर एक डॉक्‍टोरल परामर्श समिति का गठन करेगा।
    2. समिति में थीसिस सुपरवाइजर के अलावा तीन और सदस्‍य होंगे जिनमें सुपरवाइजर की अनुशंसा पर उसी अनुसंधान क्षेत्र से दो सदस्‍य होंगे तथा एक सदस्‍य संस्‍थान के निदेशक द्वारा अन्‍य अनुसंधान क्षेत्र से नामित किया जाएगा।
  • डॉक्‍टोरल परामर्श समिति, अनुसंधान कार्य में हुई प्रगति की नियमित आधार पर  समीक्षा करेगी तथा प्रत्‍येक सत्र में कम से कम एक बार बैठक करेगी और आगे की कार्रवाई निर्धारित करेगी। समिति यह भी तय करेगी कि थीसिस कब प्रस्‍तुत करनी है।
  1. समन्‍वयक, समिति की बैठकों का ब्‍यौरा डीन को देगा तथा समय-समय पर आवश्‍यक अनुमोदन लेगा।
  • समेकित परीक्षा
  1. कोई छात्र सभी पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने तथा निम्‍नतम सीजीपीए से अधिक अंक प्राप्‍त कर लेने के पश्‍चात ही समेकित परीक्षा में भाग लेने का हकदार होगा।
  2. समेकित परीक्षा बोर्ड में कम से कम तीन सदस्‍य रहेंगे – थीसिस सुपरवाइजर, उसी अनुसंधान क्षेत्र से एक सदस्‍य तथा अभ्‍यर्थी के अनुसंधान क्षेत्र से बाहर का एक सदस्‍य। बोर्ड में अधिकतम 5 सदस्‍य हो सकते हैं।
  • सुपरवाइजर के प्रस्‍ताव के आधार पर डीन प्रत्‍येक सदस्‍य के लिए बोर्ड का गठन एवं अनुमोदन करेगा जिसकी पुष्टि सीनेट चेयरमैन द्वारा की जाएगी।
  1. अभ्‍यर्थी, सुपरवाइजर से विचार-विमर्श के पश्‍चात दूसरे वे चौथे सेमेस्‍टर के मध्‍य, मौखिक समेकित परीक्षा में भाग लेगा। यदि कोई अभ्‍यर्थी दो प्रयासों के बाद भी परीक्षा उत्‍तीर्ण करने में सफल नहीं होता है तो उसका पीएचडी के लिए किया गया अस्‍थायी पंजीकरण निरस्‍त हो जाएगा।
  2. समेकित परीक्षा में अभ्‍यर्थी को प्रस्‍तुतिकरण के साथ-साथ कड़ी मौखिक परीक्षा देनी होगी। बोर्ड की सिफारिश ‘उत्‍तीर्ण’ अथवा ‘अनुत्‍तीर्ण’ के रूप में होगी।
  • स्‍टेट ऑफ द आर्ट एवं ओपन सेमीनार
  1. पीएचडी अभ्‍यर्थी को समेकित परीक्षा उत्‍तीर्ण करने के छ: माह के पश्‍चात, डॉक्‍टोरल एडवाइजरी कमेटी के समक्ष ओपन सेमिनार में पीएचडी प्रस्‍ताव के साथ-साथ स्‍टेट ऑफ द आर्ट प्रस्‍तुतिकरण देना होगा।
  2. पीएच.डी अभ्‍यर्थी को सारांश एवं थीसिस जमा करने से पहले, डॉक्‍टोरल एडवाइजरी कमेटी के सदस्‍यों की उपस्थिति में पीएच.डी. कोलोक्वियम में अपने शोध कार्य को प्रस्‍तुत करना होगा।
  • डॉक्‍टोरल एडवाइजरी कमेटी की संस्‍तुति पर, पीएचडी थीसिस में सभी अपेक्षित सुझाव शामिल कर लेने के पश्‍चात, पीएचडी थीसिस की हार्ड कापी (पांच प्रतियां) तथा सॉफ्ट कॉपी प्रयोगशाला समन्‍वयक के पास जमा करानी होंगी।
  1. सेमिनार के लिए सूचना, थीसिस सुपरवाइजर द्वारा, डॉक्‍टोरल एडवाइजरी कमेटी के सदस्‍यों से विचार-विमर्श करके, जारी की जाएगी।
  • पीएच.डी थीसिस मूल्‍यांकन
  1. किसी पीएच.डी थीसिस का मूल्‍यांकन पहले थीसिस बोर्ड द्वारा किया जाएगा और तत्‍पश्‍चात मौखिक बोर्ड (ओरल बोर्ड) द्वारा किया जाएगा।
  2. थीसिस एडवाइजर, एसीएसआईआर समन्‍वयक के माध्‍यम से, परीक्षकों का एक पैनल, डीन के पास भेजेगा जिसमें संबंधित क्षेत्र से सामान्‍यत: 6 विशेषज्ञ होंगे। इनमें संबंधित संस्‍थान से कोई भी विशेषज्ञ नहीं होगा।
  3. सीनेट चेयरमैन उपर्युक्‍त सूची में से दो परीक्षकों का चयन कर थीसिस बोर्ड का गठन करेगा।
  4. परीक्षकों की स्‍वीकृति के लिए उनसे ई मेल द्वारा सम्‍पर्क किया जाएगा।
  5. प्रयोगशाला समन्‍वयक, परीक्षकों से थीसिस रिपोर्ट लेकर पृष्‍ठांकन हेतु संबंधित डीन को भेजेगा।
  6. थीसिस परीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर डॉक्‍टोरल एडवाइजरी कमेटी आगे की क्रियाविधि अर्थात मौखिक परीक्षा आयोजित करने अथवा पुन: कार्य करने की संस्‍तुति करेगी।
  7. थीसिस सुपरवाइजर की संस्‍तुति पर सीनेट चेयरमैन द्वारा थीसिस मौखिक परीक्षा बोर्ड (ओ ई बी) गठित किया जाएगा। इस बोर्ड में कम से कम तीन सदस्‍य – जिनमें कम से कम एक बाहरी सदस्‍य, एक डीएसी सदस्‍य तथा थीसिस सुपरवाइजर शामिल होंगे।
  8. पीएच डी अभ्‍यर्थी उपर्युक्‍त ओईबी के समक्ष स्‍वयं उपस्थित होकर अपना शोध कार्य प्रस्‍तुत करेगा।
  9. ओईबी यह भी जांच करेगी कि थीसिस परीक्षक द्वारा थीसिस में सुझाए गए आवश्‍यक संशोधन कर दिए गए हैं अथवा नहीं। अभ्‍यर्थी की प्रस्‍तुति एवं मौखिक परीक्षा के दौरान उससे पूछे गए प्रश्‍नों के उत्‍तरों के आधार पर बोर्ड थीसिस कार्य को उक्‍त छात्र का शोध कार्य होने की पुष्टि करेगा।
  10. यदि मौखिक परीक्षा के दौरान बोर्ड के अधिक से अधिक एक सदस्‍य के अलावा अन्‍य सभी सदस्‍य अभ्‍यर्थी के निष्‍पादन से संतुष्‍ट हो जाते हैं तो अभ्‍यर्थी को उत्‍तीर्ण माना जाएगा।
  11. यह समिति अधिकतम एक बार अभ्‍यर्थी को थीसिस में संशोधन करके पुन: प्रस्‍तुत करने की संस्‍तुति कर सकती है।
  12. पुन: मौखिक परीक्षा होने पर ओईबी को उक्‍त छात्र को उत्‍तीर्ण अथवा अनुत्‍तीर्ण घोषित करना होगा।  तीसरी मौखिक परीक्षा के लिए कोई संस्‍तुति नहीं की जा सकेगी।