कार्यकारी निदेशक       : इंजी. यादवेन्‍द्र पाण्‍डेय
नोडल वैज्ञानिक           : डॉ. शांतनु सरकार+
सह-नोडल वैज्ञानिक     : डॉ. डी. पी. कानूनगो, डॉ. अजय चौरसिया एवं श्री एस. के. सिंह
भाग लेने वाले वैज्ञानिकों की संख्‍या – 80
वर्क पैकेज की संख्‍या – 6
एक्टिविटी टास्‍क संख्‍या – 29

प्रस्‍तावना

प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से भवन पर्यावरण की सुरक्षा अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण विषय है। ऐसे भवनों का निर्माण करना आवश्‍यक है जो विभिन्‍न प्राकृतिक आपदाओं का भली-भांति सामना कर सकें। भवन पर्यावरण पर विभिन्‍न प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले प्रभावों को वैज्ञानिक ढंग से समझना तथा सुरक्षित भवन निर्माण हेतु आपदाओं की चुनौतियों का सामना करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करना इस परियोजना प्रस्‍ताव का लक्ष्‍य है।

सुरक्षित भवन पर्यावरण के साथ-साथ, सेंसर टैक्‍नोलोजी के क्षेत्र में हुए विकास ने भी शोधकर्ताओं को स्‍मार्ट भवन पर्यावरण विकसित करने की दिशा में प्रोत्‍साहित किया है। हिमालय क्षेत्र में, प्राकृतिक आपदा के जोखिम के साथ जीना दैनिक जीवन का भाग है। हिमालयी क्षेत्र में भूकम्‍प, भूस्‍खलन, हिमस्‍खलन, ग्‍लेशियर झील फटने के कारण आने वाली बाढ़ तथा वर्षाकालीन बाढ़ आदि अनेक प्राकृतिक आपदाएं निरंतर आती रहती हैं।  पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्‍खलन, चट्टान गिरने तथा भूस्‍खलन से विशेष रूप से गम्‍भीर समस्‍याएं उत्‍पन्‍न होती हैं और आपदा न्‍यूनीकरण तथा सुधारात्‍मक उपायों का अत्‍यन्‍त अभाव है। ऐसे में कुशल न्‍यूनीकरण उपायों हेतु भूस्‍खलन गतिकी की मॉडलिंग करने के साथ-साथ जोखिम का निर्धारण करना तथा पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करना अनिवार्य है। चूँकि देश की जनसंख्‍या शहरी क्‍लस्‍टर एवं नगरों के रूप में सिमट रही है ऐसे में भूकम्‍प के संकट के कारण जान-माल का जोखिम बढ़ता जा रहा है। अपनी सुरक्षा की जिम्‍मेदारी इंजीनियरों एवं भू-वैज्ञानिकों के भरोसे छोड़कर लोग उच्‍च भूकम्‍प जोखिम वाले क्षेत्रों में निवास करते रहेंगे।  भूकम्‍प जोखिम न्‍यूनीकरण के लिए भूकम्‍पीय सूक्ष्‍म क्षेत्र निर्धारित करना तथा भूकम्‍परोधी भवनों का अभिकल्‍पन करना अनिवार्य है। यद्यपि अग्नि जोखिम हमेशा प्रलयंकारी रूप धारण नहीं करते हैं तथापि, अग्निकांडों में होने वाली जान-माल की हानि के मद्देनजर अग्निजोखिम की भयावहता को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। व्‍यापक रूप में आग लगने पर, बड़ी मात्रा में उष्‍मा उत्‍पन्‍न होने तथा गैसें और धुआं निकलने के कारण भवन पर्यावरण को क्षति हो सकती है।

भवन, विभिन्‍न सामग्रियों से निर्मित एक ऐसी जटिल संरचनात्‍मक प्रणाली होती है, जिसे प्राय: उन कठोर भार अवस्‍थाओं अथवा विपरीत पर्यावरण का सामना करना पड़ता है जिसका पूर्वानुमान डिजाइन के समय नहीं किया जाता है जिसके कारण भवन संरचना को दीर्घकालिक क्षति पहुंचती है।  इसलिए भवन को अधिक समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए इसकी सुरक्षा, टिकाऊपन, सेवा एवं निरंतरता की दृष्टि से भवन का स्‍वास्‍थ्‍य प्रबोधन करना अनिवार्य है। वायरलेस सेंसर नेटवर्क प्रणाली, क्षति संसूचन कलनविधि के माध्‍यम से किसी संरचना के स्‍वास्‍थ्‍य का पता लगाने की एक स्‍वचालित विधि है। डब्‍ल्‍यू एस एन द्वारा किसी संरचना के स्‍वास्‍थ्‍य का निरन्‍तर प्रबोधन करना महत्‍वपूर्ण है,  क्‍योंकि इससे नियमित अनुरक्षण एवं निरीक्षण की लागत बहुत ही कम हो जाती है तथा भवन के विफल होने से पहले ही भावी समस्‍याओं की सूचना इंजीनियरों को मिल जाने से भवन के सुरक्षा स्‍तर में भी वृद्धि होती है।

इंटैलीजैंट भवन संबंधी अनुसंधान के अंतर्गत एक उपयोगी, कम लागत का एवं पर्यावरण हितैषी भवन तैयार करने हेतु भवन संरचनाओं, प्रणालियों एवं सेवाओं का एकीकरण, इष्‍टतमीकरण तथा प्रबंधन शामिल है।

सुरक्षा एवं संरक्षा उपायों का स्‍मार्ट कंट्रोल युक्तियों के साथ उपयोग करके ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण हितैषी स्रोतों को प्रभावी ढंग से अपनाते हुए ग्रीन बिल्डिंग विकसित करने के लिए आधुनिक भवन वास्‍तुकला में यंत्रीकरण एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है।  परम्‍परागत भवनों की तुलना में, इन्‍टैलीजैंट बिल्डिंग व्‍यक्तिगत एवं पर्यावरण अपेक्षाओं के अनुसार प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करने में सक्षम होनी चाहिए। सीएसआईआर-सीबीआरआई अपनी तथा सीएसआईआर की सहयोगी प्रयोगशालाओं की सामर्थ्‍य का उपयोग करने के उद्देश्‍य से आपदा न्‍यूनीकरण, भवनों का स्‍वास्‍थ्‍य प्रबोधन एवं इंटैलीजेंट बिल्डिंग संबंधी कार्य हाथ में लेने को तत्‍पर है,  ताकि प्रयोगशालाओं की विशेषज्ञता का पूरी तरह उपयोग हो सके।