राजेश कुमार वर्मा
वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक
अनुसंधान दल
लीना चौरसिया
वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक

नीरज जैन
वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक
अनुसंधान क्षेत्र (RESEARCH AREAS)
- भवन निर्माण सामग्री: ईंटें, चूना, जिप्सम तथा इनके पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन/निगरानी
- भवनों में दीमक/फफूंद: भवनों में दीमक एवं फफूंद-रोधी उपचारों के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्रयास; भवनों से वनस्पति वृद्धि (जैसे पीपल, बरगद आदि) का नियंत्रण
- निर्माण रसायन: पॉलिमर कॉम्पोज़िट, एडमिक्सचर, सीलेंट सामग्री, वॉटरप्रूफिंग रसायन, सुपरप्लास्टिसाइज़र, श्वेत रंजक TiO₂, नैनो पिगमेंट
- विरासत संरक्षण हेतु सामग्री: मरम्मत सामग्री एवं सतह उपचार (नैनो लाइम, एंटी-फंगल, पारदर्शी, नैनो-टाइटानिया कोटिंग्स)
- सीमेंट/कंक्रीट की स्थिरता: बायो-कंक्रीट, प्री-फैब्रिकेटेड भवन घटक, भवन सामग्री एटलस
- अपशिष्ट से संपदा (Waste-to-Wealth): कृषि-औद्योगिक एवं धातुकर्म अपशिष्टों का उपयोग कर ऊर्जा एवं पर्यावरण पर विशेष बल के साथ भवन सामग्री का विकास; अपशिष्ट जल उपचार, औद्योगिक प्रदूषण न्यूनीकरण, खनिज कार्बोनेशन
- नई सामग्री: कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS), CO₂ पृथक्करण (Sequestration), 3-डी कंक्रीट प्रिंटिंग, ऊर्जा दक्ष सामग्री
चल रही परियोजनाएँ
उद्योग द्वारा वित्तपोषित
- भवनों में दीमक रोधी उपचार से पहले और बाद में लगाने के लिए टर्मिपोर रेटिकुलेट पाइप सिस्टम का प्रदर्शन (एसएसपी-0734)
- एएसी तकनीक का उपयोग करके फ्लाई ऐश ब्लॉक के निर्माण पर अन्य समान उत्पादों के साथ लक्षण वर्णन और तुलनात्मक अध्ययन द्वारा तकनीकी मूल्यांकन (एसएसपी0664)
- खनिज योजकों और सल्फरशोधन संयंत्र से प्राप्त एफजीडी अपशिष्ट का उपयोग करके मिश्रित प्लास्टर का विकास (एसएसपी1074)
सीएसआईआर द्वारा वित्त पोषित:
- भारत के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के अनुरूप जलवायु-प्रतिरोधी इमारतों के विकास और विकास के लिए विश्वकोशीय कार्य, “भारत के लिए टिकाऊ और ऊर्जा कुशल जलवायु-प्रतिरोधी इमारतों का विकास (एचसीपी-59)” के अंतर्गत।”
- फेनोम इंडिया सीएसआईआर हेल्थ कोहोर्ट नॉलेजबेस (एचसीपी -47)
- भारत के लिए जलवायु-प्रतिरोधी भवन निर्माण मिशन (एचसीपी 059) के अंतर्गत निर्माण कार्यों में उपयोग के लिए लागत प्रभावी जल उपचार प्रणाली।”
- इन्सुलेशन और निर्माण अनुप्रयोगों के लिए अपशिष्ट कांच का उपयोग करके ग्लास फोम का विकास (एचसीपी 054)
- स्वदेशी निर्माण रसायनों का विकास: कंक्रीट के लिए सुपरप्लास्टिसाइज़र और पेंट अनुप्रयोगों के लिए TiO (IHP240002)
- कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस): भवन निर्माण में CO2 का उपयोग (एचसीपी-48)
लैब परियोजनाएं:
- भवन निर्माण कार्यों के लिए ठोस कार्बोनेट बनाने हेतु अपशिष्ट जिप्सम का खनिज कार्बनीकरण (ओएलपी-2305)
- भवन निर्माण अनुप्रयोगों के लिए स्प्रे ड्रायर तकनीक का उपयोग करते हुए वांछित तापमान सीमा (परिवेश से 80 ℃) पर चरण परिवर्तन सामग्री (पीसीएम) के माइक्रोएनकैप्सुलेशन की पूर्व-पायलट पैमाने पर तैयारी (ओएलपी-2305)
पूर्ण की गई परियोजनाएँ
- बायोचार का उपयोग कर हरित एवं सतत समग्र भवन सामग्री का विकास (2023–2024)
- उच्च ड्राफ्ट ईंट भट्टों की स्टैक मॉनिटरिंग एवं जिला अबोहर, पंजाब में प्रदूषण भार का निर्धारण (2023–2024)
- आंतरिक ईंधन के उपयोग द्वारा कम कार्बन फुटप्रिंट वाली ऊर्जा दक्ष जली हुई मिट्टी की ईंट प्रौद्योगिकी का व्यावसायीकरण (2022–2024)
- आंतरिक उपयोग हेतु उच्च मात्रा फ्लाई ऐश–जिप्सम समग्र प्लास्टर का विकास (2022–2024)
- फ्लाई ऐश एवं औद्योगिक अपशिष्टों से CO₂ पृथक्कृत इंजीनियर्ड एग्रीगेट्स का विकास (2022–2024)
- ओपीसी (43 ग्रेड) एवं पीपीसी सीमेंट का भौतिक–रासायनिक चरित्रण (2022–2023)
- फ्लाई ऐश एवं लाइम स्लज का उपयोग कर CO₂ पृथक्कृत कृत्रिम एग्रीगेट्स का विकास (2022–2023)
- नई चौथी पीढ़ी की प्रौद्योगिकी से निर्मित कंक्रीट मिश्रणों का मूल्यांकन (2022)
- पत्थर संरचनाओं के पर्यावरणीय क्षरण का अध्ययन एवं जिप्सम आधारित मरम्मत सामग्री का विकास (जनवरी 2021 से 2025)
- विरासत भवनों पर वनस्पति विविधता का अध्ययन एवं संरक्षण हेतु सतह उपचार का विकास (2021–2025)
- पंजाब राज्य में पर्याप्तता प्रमाणपत्र जारी करने हेतु ज़िग-ज़ैग व्यवस्था वाले आयताकार उच्च ड्राफ्ट ईंट भट्टों का भौतिक सत्यापन (2020–2022)
- एफजीडी जिप्सम का उपयोग कर जिप्सम–वर्मीक्यूलाइट प्लास्टर (GVP) का विकास (2020–2022)
- एफजीडी जिप्सम एवं फ्लाई ऐश से उच्च शक्ति प्लास्टर का विकास (2020–2022)
- कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों के उप-उत्पाद फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (FGD) जिप्सम से उच्च शक्ति बाइंडर हेतु प्रौद्योगिकी का विकास (2020–2022)
- कम कार्बन फुटप्रिंट वाली पर्यावरण-अनुकूल एवं ऊर्जा दक्ष जली हुई मिट्टी की ईंटों के निर्माण हेतु प्रौद्योगिकी पैकेज का विकास (2020–2022)
- ईंट भट्टों से श्वसन योग्य धूल उत्सर्जन नियंत्रण हेतु वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (वेट स्क्रबिंग) का डिज़ाइन एवं ड्रॉइंग (2020–2021)
- चयनित विरासत संरचनाओं पर फफूंद की पहचान एवं औषधीय पौधों से उपयुक्त एंटी-फंगल रसायन का विकास (2018–2020)
- फ्लुओरो-जिप्सम से मूल्य संवर्धित भवन घटकों के विकास हेतु व्यवहार्यता अध्ययन (2018–2019)
- वर्षा जल नालियों की सिल्ट, जल/सीवेज उपचार संयंत्रों की स्लज एवं वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र की राख का उपयोगी उत्पादों में पुनर्चक्रण (2017–2018)
- ईटीपी स्लज के उपयोग से मूल्य संवर्धित भवन सामग्री के विकास हेतु व्यवहार्यता अध्ययन (2016–2017)
- रासायनिक रूप से क्रॉस-लिंक्ड फोम का मूल्यांकन (2015–2016)
- प्रबलित कंक्रीट विरासत भवन—सचिवालय भवन, चंडीगढ़ का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन (2014–2015)
- भारत के उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में भवनों की बाहरी एवं आंतरिक सतहों पर फफूंद प्रबंधन हेतु पर्यावरण-अनुकूल घटकों का विकास (EMPOWER) (2010–2012)
- भवनों में दीमक एवं फफूंद नियंत्रण हेतु पर्यावरण-अनुकूल सामग्री/घटकों का विकास (2010–2012)
- भवनों में फफूंद एवं चयनित फाइटोकेमिकल्स द्वारा उनके नियंत्रण पर अध्ययन (2008–2010)
- सीएसआईआर–सीबीआरआई, रुड़की की 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत स्व-उपचार सामग्री के रूप में बायो-कंक्रीट (2007–2012)
- दीमक नियंत्रण हेतु कीटनाशी गुणों वाले चयनित फाइटोकेमिकल्स की जाँच एवं पर्यावरण-अनुकूल फफूंदनाशकों का विकास (2001–2003)
- दीमक नियंत्रण हेतु जैव-सक्रिय पौध अणुओं का मूल्यांकन (1998–2002)
- भवनों के लिए पर्यावरण-अनुकूल दीमक नियंत्रण प्रबंधन पर अध्ययन (1998–2000)
- दीमक के व्यवहार एवं नियंत्रण उपायों पर अध्ययन (1998–2000)
- भवनों में गैर-विषाक्त दीमक नियंत्रण उपायों का विकास (1997–1999)
Last Updated on January 30, 2025
अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें:
डॉ. राजेश के. वर्मा
प्रमुख (हेड)
भवन निर्माण सामग्री एवं पर्यावरणीय स्थिरता समूह
फोन : +91-1332-283271, 283306, 283364
फैक्स : +91-1332-272272
ई-मेल : rkverma_cbri [at] cbri.res.in













